Dr. B. R. Ambedkar

“A great man is different from an eminent one in that he is ready to be the servant of the society.” “Political tyranny is nothing compared to the social tyranny and a reformer who defies society is a more courageous man than a politician who defies Government.”

राजर्षि शाहू महाराज

राजर्षि शाहू महाराज ने भारत के इतिहास में सुनहरा युग बनाया।उनके राज्य और लोगों की प्रगति के लिए सामाजिक सुधार और राजनीतिक कार्य के संबंध में राजर्षि शाहू की तुलना में कोई अन्य राजा नहीं था।

Shudras

Without education wisdom was lost; without wisdom morals were lost; without morals development was lost; without wealth the shudras were Ruined; so much has happned through lack of education.

Ramabai

Ramabai Bhimrao Ambedkar, the wife of Dr BR Ambedkar, is fondly remembered as Ramai or Mother Rama. Ramabai was known for her humility, resilience and compassion. Not many know that Babasaheb Ambedkar’s life was influenced greatly by her. Ramabai assisted the Father of the Indian Constitution in seeking higher education abroad and supported his efforts for social justice.

भारत के लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद

“पहली पीड़ी के मारे जाएंगे,दूसरी पीड़ी के जेल जायेंगे,तीसरी पीड़ी के लोग राज करेंगे| “

अपने ऐसे विचारो को लेकर बिहार में जन्मे बाबू जगदीश प्रसाद आज पूरे देश में भारत के लेनिन नाम से जाने जाते है जिनका आज 2 फरवरी को जन्म दिवस है|

संत रविदास

रविदास जी को गुरु रविदास, भगत रविदास जी, संत रविदास, रैदास, रोहिदास और रूहिदास के नाम से भी जाना जाता है। वे पंद्रहवीं शताब्दी में हुए थे। उनके काम का भक्ति विचारधारा पर गहरा प्रभाव पड़ा। वे एक समाज सुधारक, मानवतावादी, धार्मिक व्यक्ति, विचारक और महान कवि थे। वह दुनिया भर में कुटबंदोला चमार जाति के थे। उनके 5 शब्द श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं। इसके अलावा उनकी और भी बहुत सी रचनाएँ देखने को मिल सकती हैं। उनका काम ईश्वर, गुरु, ब्रह्मांड और प्रकृति के लिए प्रेम का संदेश देते हुए मनुष्य की भलाई पर जोर देता है।

गाडगे महाराज

गाडगे महाराज, जिन्हें लोकप्रिय रूप से संत गाडगे महाराज या गाडगे बाबा कहा जाता था. एक संत और समाज सुधारक थे. व्यापक रूप से महाराष्ट्र के सबसे बड़े समाज सुधारकों में से एक के रूप में माना जाता है, उन्होंने कई सुधार किए हैं. गाँवों का विकास और उनकी दृष्टि अभी भी देश भर के कई दान संगठनों, शासकों और राजनेताओं को प्रेरित करती है. उनके नाम पर कॉलेज और स्कूल सहित कई संस्थान शुरू किए गए हैं. उनके बाद भारत सरकार द्वारा स्वच्छता और पानी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा की गई. उनके सम्मान में अमरावती विश्वविद्यालय का नाम भी रखा गया है. उनके सम्मान में महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘संत गाडगेबाबा ग्राम स्वछता अभियान’ शुरू किया गया था.

सावित्रीबाई फुले

महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में एक दलित परिवार में 3 जनवरी 1831 को जन्‍मी सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थी। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले शिक्षक होने के साथ भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता, समाज सुधारक और मराठी कवयित्री भी थी। इन्‍हें बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। कई बार तो ऐसा भी हुआ जब इन्हें समाज के ठेकेदारों से पत्थर भी खाने पड़े।

शिवाजी महाराज

शिवाजी भारतीय इतिहास के सबसे पराक्रमी योद्धा माने जाते हैं| निडरता और साहस की प्रतिमूर्ति वीर छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1627 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। शिवाजी के जन्म के समय सम्पूर्ण भारत में मुगलों का राज था। शिवाजी ही वो शख्स थे जिन्होंने औरंगजेब जैसे क्रूर शासक को नाकों चने चबवा दिए थे और मराठा साम्राज्य स्थापित किया था।

संत सेवालाल महाराज

संत सेवालाल महाराज का जन्म 15 फेबुवारी 1739 के दिन गोलार डोडी तांडा ता.गुंती, जि.अनंतपुर (आंध्रप्रदेश) में हुआ ऐसा मना गया है. बंजारा समाज के महान तपसी भगवान संत सेवालाल महाराज अन्नपढ़ भटक्या जाती के संत गौरबंजारा समाज के मार्गदर्शक, समाज सुधारक, क्रांतिकारी भगवंत थे.बंजारा समाज के एक गाव में पशुपालन कुटुंब से पिता भीमा नायक रामावत और माता धर्मनी के पेट से जन्म हुआ है.

नारायण गुरु

 श्री नारायण गुरु केरल के एक प्रसिद्ध सामाजिक व धार्मिक सुधारक थे. वे झझवास जाति के लोगों के लिए एक प्रेरक प्रतिनिधि के रूप में आगे बढ़ कर आये जिन्हें अछूत जाति के रूप में विचारित व व्यव्ह्त किया जाता था. उन्होंने ब्राह्मणों के प्रभुत्व व पुरोहिताई का जमकर विरोध किया तथा सभी जातियों के लिए मन्दिर में प्रवेश के अधिकार का प्रबल समर्थन किया.

पेरियार ई.वी. रामास्वामी

इरोड वेंकट नायकर रामासामी का जन्म 17 सितम्बर 1879 को मिलनाडु के इरोड में एक सम्पन्न और  परम्परावादी हिन्दू परिवार में हुआ था ई.वी. रामास्वामी एक तमिल राष्ट्रवादी, राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे। इनके प्रशंसक इन्हें आदर के साथ ‘पेरियार’ संबोधित करते थे। इन्होने ‘आत्म सम्मान आन्दोलन’ या ‘द्रविड़ आन्दोलन’ प्रारंभ किया था। उन्होंने जस्टिस पार्टी का गठन किया जो बाद में जाकर ‘द्रविड़ कड़गम’ हो गई। वे आजीवन रुढ़िवादी हिन्दुत्व का विरोध करते रहे और हिन्दी के अनिवार्य शिक्षण का भी उन्होने घोर विरोध किया। उन्होंने दक्षिण भारतीय समाज के शोषित वर्ग के लिए आजीवन कार्य किया।

बिरसा मुंडा

 बिरसा मुंडा  एक आदिवासी नेता और लोकनायक थे। ये मुंडा जाति से सम्बन्धित थे। वर्तमान भारत में रांची और सिंहभूमि के आदिवासी बिरसा मुंडा को अब ‘बिरसा भगवान’ कहकर याद करते हैं। मुंडा आदिवासियों को अंग्रेज़ों के दमन के विरुद्ध खड़ा करके बिरसा मुंडा ने यह सम्मान अर्जित किया था। 19वीं सदी में बिरसा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक मुख्य कड़ी साबित हुए थे।

पेरियार ललई सिंह यादव

ललई सिंह यादव का जन्म एक सितम्बर 1911 को ग्राम कठारा रेलवे स्टेशन-झींझक, जिला कानपुर देहात के एक कृषक परिवार में हुआ था. ललई सिंह यादव का परिवार अंधविश्वास और रूढ़ीवाद के पीछे दौड़ने वाला नहीं था. ललई सिंह यादव ने साल 1928 में हिन्दी के साथ उर्दू लेकर मिडिल पास किया. साल 1929 से 1931 तक फॉरेस्ट गार्ड रहे. 1931 में ही का ललई सिंह यादव का विवाह श्रीमती दुलारी देवी के साथ हुआ. 1933 में शशस्त्र पुलिस कम्पनी में कान्स्टेबिल पद पर भर्ती हुए.

रामस्वरूप वर्मा

लगभग पचास साल तक राजनीति में सक्रिय रहे रामस्वरूप वर्मा को राजनीति का ‘कबीर’ कहा जाता है. किसान परिवार मेें जन्मे वर्मा ने एक लेखक, समाज सुधारक और चिंतक के रूप में उत्तर भारत पर गहरा असर